Asthang Ayurveda


  • अभ्यंगम
    पंचकर्मा

    यह पंचकर्मा चिकित्सा विधि का पूर्वकर्म है |इसमें औषधीय तेल से पूरे शरीर पर ३०-४० मिनट तक मसाज की जाती है यह जोड़ो क दर्द मोटापा ,तनाव ,अनिद्रा एवं अन्य वाट जनित रोगो में विशेष लाभदायक होता है


  • कटी बस्ती
    पंचकर्मा

    कटी बस्ती विषेकर कमर दर्द ,स्लिप डिस्क ,लंबर स्पेडिलटिक्स ,सायटिका एवं अन्य लम्बर डिजेनरेशन की बीमारियों में अत्यंत लाभदायक होता है | इसके अंतर्गत औषधीय तेल को गर्म करके कमर क हिस्से में गोल बनाकर रखते है |

  • तर्पण
    पंचकर्मा

    तर्पण आँखों की बीमारियों के लिए विशेष पंचकर्म चिक्तिसा विधि है | इसमें आँखों के चारो ओर घेरा बनाकर औषधीय गुड़ युक्त दर्व्यो का प्रयोग किआ जाता है इस विधि के द्वारा मंश्पेशिया , चश्मे के नंबर को काम किआ जा सकता है | रेटिना की बीमारियों में जैसे रेतनीआइटिस पिगमेंटोसा ,मैकुलर एवं अन्य नेत्ररोग में विशेष लाभ पहुँचता है |

  • जानू बस्ती
    पंचकर्मा

    यह एक प्रभावशाली चिकित्सा विधि है |विशेष रूप से घुटने के चारो ओर घेरा बनाकर उसमे तेल डाला जाता है |जिससे दर्द का सामान होता है |एवं जकड़न दूर होती है



  • ग्रीवा बस्ती
    पंचकर्मा

    ग्रीवा बस्ती में गर्दन के भाग में घेरा बनाकर दर्द नाशक औषधीय गुड़ युक्त तेल दाल जाता है |जिससे सर्विकल स्पेन्डिलटीस एवं अन्य गर्दन सम्बन्धी रोगो में लाभ मिलता |


  • शिरोधारा
    पंचकर्मा

    शिरोधारा केरलीय पंचकर्म का एक महत्वपूर्ण अंग है | इसके अंतर्गत अलग- अलग विधियों के अनुसार तेल क्वाथ,छीर आदि दर्व्यो से सर पैर लगाकर धार दी जाती है |यह विशेष रूप से तनाव ,अनिद्रा ,सिरदर्द मयगराइन ,नेत्र रोग ,कान के रोग ,यादाशत में कमी बालो का गिरना एवं सफ़ेद ह्ण बीमारियों में किया जाता है

  • नस्य कर्मा
    पंचकर्मा

    यह ऊध्वरंग रोगो की विशेष चिक्तिसा विधि है।जैसे नाक, कान ,गाला रोग नेत्र रोग सिरदर्द ,मायग्रेन ,बालो का गिरना एवं सफ़ेद होता साइनुसाटिक्स नाक की हड्डी बढ़ना आदि इस विधि में औषधीय तेल नाक के अंदर डाला जाता है।बीमारी के अनुसार इसकी मात्रा तय की जाती है

  • विरेचना
    पंचकर्मा

    विरेचना पंचकर्मा द्वारा शरीर का सोधन किया जाता है ।पुवाकर्म के पश्चात् औषधीय द्वारा पेट से पित्त दोष को बाहर निकला जाता है । जैसे त्वचा के रोग डायबिटीज़ ,अम्ल पित्त ,नेत्र रोग ,मोटापा आदि ।

  • लीच थेरपि
    पंचकर्मा

    रक्तमोक्षण पंचकर्म चिकित्सा का विशेष अंग है ।इस्सके द्वारा शरीर के किसी एक भाग जहा रोग हो उस स्थान से अशुद्ध रक्त को बहार किया जाता है । इस विधि में जलौका विधि सबसे अच्छी मणि जाती है ।इसका प्रयोग विशेष कर सोराइसिस ,वैरिकोज वेन ,जोड़ो के दर्द में किया जाता है ।

  • नाड़ी स्वेदन
    पंचकर्मा

    नाड़ी स्वेदन में वातशामक औषधीय से नाड़ी द्वारा स्वेद किया जाता है ।यह विशेषकर शरीर के विभिन्न अंगो में दर्द एवं जकड़न की स्तिथि में किआ जाता है ।जोड़ो के दर्द ,कमर के दर्द ,स्प्रेन फ्रोजेन शोल्डर आदि की बीमारियों में विशेष लाभ देता है।

  • वमन
    पंचकर्मा

    वमन चिकित्सा पंचकर्मा का विशेष अंग है इसमें शरीर का शोधन किया जाता है ।कुछ औषधि पिलाकर उलटी कराई जाती है । जिससे पेट की एवं पुरे शरीर से विषतासा बाहर निकलती है ।यह विशेष रूप से पेट संबधी बीमारियों एवं त्वचा रोगो में किया जाता है|

  • ह्रदय बस्ती
    पंचकर्मा

    ह्रदय बस्ती चिकित्सकीय कार्डियक डिसऑर्डर के रोगियों जैसे कि कार्डिक अवरोध, कोरोनरी आर्टरी डिज़ेस आदि में उपयोगी है। इस दिल से मांसपेशियों को मज़बूत किया जाता है और हृदय के सूक्ष्म पोत रोगी बन जाते हैं जो उन में रक्त के प्रवाह को अनुमति देते हैं।